कॉलेज की टॉपर को हिजाब पहने होने की वजह से गोल्ड देने से किया इंकार, फिर इस लड़की ने दिया करारा जवाब

एक गोल्ड मेडलिस्ट जिसने बुर्के में रहकर ही पढाई की और गोल्ड मेडल हासिल किया उसको आप स्टेज़ पर इसलिये नहीं चढने देंगे क्योंकि उसने बुर्का पहना है ! ये कौन सा नियम है साहब?

मुसलमा’नों के प्रति लोगों की धारणाएं दिन व दिन बढ़ती जा रही हैं| मुस्लि’म पहनावे को लोग दिन व दिन खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं| मुस्लि’म पहनावे यानि बुरखे को लेकर ऐसा ही एक मामला सामने आया है
रांची के मारवाड़ी कॉलेज की ग्रेजुएशन सेरेमनी थी सेरेमनी में डिग्री लेने आई ओवर ऑल बेस्ट ग्रेजुएट निशत फातिमा समारोह में डिग्री नहीं ले सकी. क्यों? क्योंकि वह बुर्के में आई थी.

गोल्ड मेडल के लिए निशत का नाम सबसे पहले पुकारा गया. वह बुर्के में थी इसलिए उसे स्टेज पर जाने से रोक दिया गया और मंच से कहा गया कि निशत कॉलेज द्वारा तय ड्रेस कोड में नहीं हैं इसलिए उन्हें समारोह में डिग्री नहीं दी जाएगी

निशात फातिमा ने कहा कोई पर्दे में रहना चाहता है तो आपको क्या आपत्ति है ??पचासों एैसे उदाहरण हैं कि लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं और परिधानों के हिसाब से पढाई कर रहे हैं इसके बाद वह अपने सीट पर जाकर बैठ गई. इसके बाद दूसरे टॉपर्स को डिग्री दी गई.

वही निशत के पिता मोहम्मद इमरामुल ने डिग्री नहीं दिए जाने को लेकर कहा कि निशत बिना बुर्का के कहीं नहीं जाती है. बुर्का हमारी परंपरा में शामिल है. इसलिए उसने पर्दा के लिहाज से बुर्का नहीं उतारा.

इस बात पर रिएक्ट करते हुए है एक शायर ने कहा शाबास निशत फ़ातिमा ये ज़हनियत आपको मंच पर चढने से रोक सकती है, आपसे आपका हुनर और इल्म थोडे ही छीन सकती है

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