ट्रेन के सामने लेट गया-कटवा लिए दोनों पैर, फिर ऐसे बनाया कंपनी को चूना लगाकर 24 करोड़ रु हड़पने का प्लान

इंश्योरेंस का पैसा पाने के लिए Hungary के शख्स ने पत्नी के साथ मिलकर एक कहानी रची। सबसे पहले पटरियों पर गया। वहां ट्रेन के सामने लेट गया। ट्रेन आई और दोनों पैर कट गए।
हंगरी. इंश्योरेंस के पैसे पाने के लिए लोग कई तरह के जतन करते हैं। कुछ फेक केस बनाकर पैसे लेना चाहते हैं। लेकिन हंगरी (Hungary) की एक घटना इन सबसे आगे है। वहां एक व्यक्ति ने इंश्योरेंस (Insurance) के पैसे लेने के लिए अपने दोनों पैर ही कटवा लिए। वह ट्रेन के आगे लेट गया। जब दोनों पैर कट गए तो सोचा कि अब पैसे मिल जाएंगे। लेकिन कोर्ट में मामला फंस गया और पूरी पोल खुल गई। अब उस व्यक्ति को जेल जाना पड़ा। कोर्ट ने जुर्माना भी लगाया।

24 करोड़ रुपए का इंश्योरेंस था
द मिरर (The Mirror) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, £2.4 मिलियन यानी करीब 24 करोड़ रुपए के भुगतान (Insurance Claim) के लिए उस व्यक्ति ने ये पूरा नाटक रचा। व्यक्ति का नाम सैंडोर है। कोर्ट में ये साबित हो गया कि वह जानबूझकर ट्रेन के सामने लेट गया ताकि वह इंश्योरेंस का पैसा ले सके। घटना साल 2014 की है। ट्रेन की वजह से घुटने के नीचे से दोनों पैर कट गए थे। वह व्हीलचेयर की मदद से चल रहा था। जब ये मामला कोर्ट पहुंचा तो अब जाकर इसपर फैसला हुआ है।

इंश्योरेंस कंपनी को क्या कहानी बताई थी
हंगरी के न्यिरकसजारी में रहने वाले 54 साल के सैंडोर ने बताया था कि वह पटरियों को क्रॉस कर रहा था, उसी दौरान ट्रेन से हादसा हुआ और उसके दोनों पैर कट गए थे। हादसे के करीब 7 साल बाद 9 नवंबर को कोर्ट ने फैसला सुनाया। कोर्ट में बताया गया कि कैसे हादसे से एक साल पहले उसने 14 जीवन बीमा पॉलिसी लीं। उसने अपने दो फाइनेंस एडवाइजर को ये कहकर निकाल दिया था कि बचत करने से अच्छा है कि कुछ बीमा पॉलिसी ले ली जाए और उससे पैसा कमाया जाए।

घटना के बाद पत्नी ने किया था भुगतान का आवेदन
घटना के बाद उनकी पत्नी ने भुगतान के लिए आवेदन किया था, लेकिन बीमा कंपनियों ने कहा कि उन्हें शक है कि उनके पति ने खुद को चोट पहुंचाई है। कोर्ट में बताया गया था कि आरोपी निर्दोष है। हादसे की कहानी बताते हुए उसने कहा था कि कांच के एक टुकड़े पर कदम रखा, जिसके बाद वह अपना बैलेंस खो बैठा और ट्रेन के सामने गिर गया। कोर्ट ने सैंडोर को दोषी पाया। हालांकि अभी ये स्पष्ट नहीं हुआ है कि इस फैसले के खिलाफ वह अपील कर पाएगा या नहीं।

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