शहाना को सुहानी सिंह बना कर रखता था दरोगा राजेंद्र सिंह, करता था प्रताड़ित मौत के बाद खुला राज़

गोरखपुर की एक लड़की की शहाना दरोगा राजेंद्र सिंह के साथ 10 माह से रह रही थी। दारोगा ने उसका नाम बदल कर सुहानी सिंह रख दिया था। किसी को शक न हो इसिलिये उसे सिंदूर, बिंदी और मंगलसूत्र पहनाता था।

गोरखपुर के बक्शीपुर में शहाना मल्ल अस्पताल वाली गली में पुलिस दरोगा राजेंद्र सिंह के साथ 10 माह से रह रही थी। दरोगा ने उसका नाम सुहानी सिंह रखा था। दरोगा के आस पड़ोसियों ने बताया कि उसको मोहल्ले के सब लोग सुहानी नाम से ही जानते थे।
वो तो घटना के बाद पता चला उसका असली नाम शहाना है। बक्शीपुर से पहले वह तिवारीपुर में किराए पर कमरा लेकर रहती थी।

सीधी साधी, हसमुख और मिलनसार आदत की शहाना ने दरोगा के दबाव में वह सबकुछ किया जो उसने कहा। दरोगा के कहने पर उसने अपना नाम सुहानी सिंह रख लिया। मकान मालिक के साथ ही पड़ोस में रहने वाले लोग भी उसका यही नाम जानते थे।

नवरात्री के पहले व आखिरी दिन व्रत रहने के साथ ही उसने घर पर पूजा पाठ भी किया था। दारोगा का उत्पीड़न झेलने के 10 माह बाद तक उसने किसी को यह नहीं बताया कि उसका असली नाम शहाना है।
पड़ोसियों ने तो यहां तक बताया की कई बार तो ऐसा भी हुआ कि घर छोड़ने के लिए शहाना ने अपना सामान उनके घर रख दिया लेकिन दारोगा जबरन उठा ले गया।

अक्सर बातों बातों में वह कहा करती थी कि अपने बेटे की वजह से इस बूढ़े आदमी का उत्पीड़न सह रही हूं, नहीं तो छोड़कर चली जाती। LIU की स्पेशल ब्रांच में तैनात राजेंद्र सिंह अपने सहकर्मियों से कहता था कि झांडू पोंछा और खाना बनाने के लिए शहाना को कमरे पर रखा हूं।

दिसंबर 2020 में जन्म होने की वजह से शहाना ने बेटे का नाम ट्वेंटी रख दिया था।मकान मालिक और पड़ोसियों ने बताया कि इसको लेकर कई बार सवाल किया तो हंसते हुए शहाना ने कहा कि 2020 में जन्म होने की वजह से इसका नाम ट्वेंटी रखा है।

हत्या का आरोप लगने पर हिरासत में लिया गया दारोगा राजेंद्र सिंह तीन दिन तक कोतवाली पुलिस की हिरासत में रहा। रविवार को मुकदमा दर्ज होने के बाद रात में कोतवाली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले वह थाने में बेखौफ रहा।

दूसरे दारोगा व सिपाही उसे पान व गुटखा खिलाते रहे। शहाना के भाई ने बात करने और फोटो लेने का प्रयास किया तो सबके सामने ही जान से मारने की धमकी देते हुए भगा दिया। 15 अक्टूबर की सुबह से कोतवाली थाने में बैठाए गए दारोगा राजेंद्र सिंह के चेहरे पर कोई शिकन तक नहीं थी।

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