60 की उम्र में पति की जान बचाने के लिए साड़ी पहनकर नंगे पैर मैराथन में दौड़ी लता, इनाम के पैसो से बचाई पति की जान

मुंबई: ऐसे ही पत्नियों को अर्धागिनी नहीं कहा जाता है. सतयुग से लेकर कलयुग तक जब-जब पतियों पर आंच आती है तो उनकी पत्नियां ढाल की तरह उनके सामने खड़ी होती हैं. पौराणिक काल में सुना ही था कि सावित्री ने अपने पति सत्यवान की जान यमराज से बचाई थी. ऐसा ही कुछ साहस पति की जान बचाने के लिए इस कलयुग की पत्नी ने किया है. चलिए आज हम आपको उनके बारे में बताते हैं. एक पत्नी ने अपने पति की जान बचाने के लिए मैराथन में दौड़ लगाई है. इतना ही नहीं प्रधम स्थान भी हासिल किया है.
पति की जान बचाने के लिए मैराथन में बिना जूतों के दौड़ी लता खरे
ऐसे में जब हम आपको महिला के उम्र के बारे बताएंगे तो आपके दांत खट्टे हो जाएंगे. जी हां मैराथन में हिस्सा लेने वाली जिस महिला की बात कर रहे है उनकी उम्र 60 साल है. यह घटना साल 2014 की है. 60 साल की आयु होने के बावजूद लता खरे नाम की यह महिला 3 किलोमीटर लंबी मैराथन दौड़ में ना केवल दौड़ी बल्कि उसमें प्रथम क्रमांक भी हासिल किया.

आज के समय में मैराथन दौड़ की बात निकलते ही अच्छे-अच्छे खिलाड़ियों के पसीने छूट जाते हैं. जबकि इतनी सारी सुख सुविधाएं होने के बावजूद भी कई खिलाड़ी मैराथन दौड़ में हिस्सा लेने भागते हैं. ऐसे में इस बुजुर्ग महिला ने मैराथन दौड़ में दौड़ लगाकर एक मैराथन खिलाड़ियों के लिए अनोखी मिसाल कायम की है.

60 उम्र में मैराथन में लिया हिस्सा, प्राप्त किया प्रथम स्थान
आपको बता दें महाराष्ट्र की रहने वाली लता खरे ने बताया कि उसने मैराथन में हिस्सा लेने का विचार इसलिए किया क्योंकि उसे 5000 रूपये की आवश्यकता थी. दरअसल लता के पति की तबीयत बहुत खराब थी और इलाज के लिए उसे 5000 रूपये की जरूरत थी. इसी दौरान कहीं से लता ने मैराथन दौड़ का विज्ञापन देखा और उसी समय ठान लिया कि इस दौड़ में दौड़ कर ही वे अपने पति के लिए प्रथम क्रमांक प्राप्त करके पैसों का इंतजाम कर लेंगी.
पति को याद करते हुए लता ने दौड़ को किया पूरा
ऐसे में लता ने मैराथन में हिस्सा लिया. मैराथन के दौरान लता ने साड़ी और हवाई चप्पल पहनकर ही मैराथन में दौड़ पड़ी. लता के पास स्पोर्ट्स शूज भी नहीं थे. दौड़ते दौड़ते लता की हवाई चप्पल भी टूट गई परंतु फिर भी वह रुकी नहीं और उन्होंने मैराथन में प्रथम स्थान प्राप्त किया. लता ने 3 किलोमीटर लंबी इस मैराथन दौड़ में प्रथम क्रमांक प्राप्त करके सभी को चौंका दिया था. जब लता से पूछा गया कि उन्होंने ऐसा चमत्कार कैसे कर लिया तो लता ने बताया कि दौड़ते समय उनकी आंखों के सामने केवल उनके पति का चेहरा था, इसीलिए उन्होंने इस दौड़ को कब पूरा कर लिया उन्हें पता तक नहीं चला.

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